रविवार, 1 सितंबर 2013

दिल कहीं लगता नहीं है इन दिनों
दिन कभी ढलता नहीं है इन  दिनों

यूँ तो सारी ज़िन्दगी कट जायेगी
पल कोई कटता  नहीं है इन दिनों

आईना तो  देख ती हूँ रोज़ ही
अक्स वो दिखता नहीं है इन दिनों

बंद  हैं  यादों के गलियारे  सभी
शख्स  वो मिलता नहीं है इन दिनों

रात  दिन ये  सोच कर   हैरान   हूँ
कुछ भी क्यों खलता नहीं है इन दिनों

2 टिप्‍पणियां:

  1. बंद हैं यादों के गलियारे सभी
    शख्स वो मिलता नहीं है कुछ दिनों से ..

    यादों पे किसी का बस नहीं होता ... दरवाजे खोलिए ओर मिल लीजिए ...

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  2. धन्यवाद दिगम्बर नासवा जी।

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